Light ka avishkar kisne kiya। Full details In hindi

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Light ka avishkar kisne kiya।
Light ka avishkar kisne kiya

Light ka avishkar kisne kiya : दोस्तों! प्रकाश का हमारे जीवन में एक महत्वपूर्ण योगदान होता है जिसके जरिए हमारी दिनचर्या और भी आसान होती जा रही है। प्रकाश से जुड़े कई महत्वपूर्ण खोज एवं आविष्कार विज्ञान में संरक्षित है। इससे संबंधित कई महत्वपूर्ण रोचक तथ्य भी इसके बारे में अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां उपलब्ध करवाते हैं।

आज हम प्रकाश के आविष्कार को लेकर कई विषयों से आपको अवगत करवाने वाले हैं जिसमें सबसे महत्वपूर्ण है Light ka avishkar kisne। प्रकाश के बारे में पढ़ते वक्त आपके दिमाग में यह सवाल तो जरूर आया होगा कि Light ka avishkar kisne kiya, तो इसके बारे में हम आपको इस लेख के माध्यम से आज महत्वपूर्ण जानकारी देने वाले हैं,

प्रकाश का आविष्कार किसने किया ? (  Light ka avishkar kisne kiya )

विद्युत प्रकाश की खोज सर्वप्रथम सन् 1800 में एक अंग्रेजी वैज्ञानिक हम्मरी डेवी द्वारा की गयी थी। अपने इस आविष्कार में उन्होंने बिजली का इस्तेमाल किया और उससे बिजली की बैटरी का आविष्कार किया था। जिसका उपयोग हम अपने घरों और कई जगहों पर उजाला करने के लिए करते हैं।

Light ka avishkar kisne kiya।
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प्रकाश की गति  ( speed of light )

प्रकाश की गति जिसकी खोज 340 साल पहले की गई थी। 7 दिसंबर 1976 को यूरोप के पहले साइंटिफिक जनरल द जर्नल डेस स्केवेन्स ने इसके बारे में पहली बार छापा था। यह जनरल अभी भी चलता है और वर्तमान में इसे जनरल डेस सेवेन्टस के नाम से जाना जाता है।

डेनिश खगोलविद ओले क्रिस्टेंसेन रोमर एक ऐसे खगोलविद थे जिन्होंने प्रकाश की गति संबंधित जानकारियों का पता लगाया। रोमन से पहले गैलीलियो और न्यूटन ने भी इसके बारे में पता लगाया परंतु प्रकाश के वेग से संबंधित जानकारियां उपलब्ध नहीं करवा सके।

पहली बार सन् 1676 में प्रकाश के वेग को निर्धारित किया गया था। रोमर ने अपनी इस खोज को 1673 में उस समय शुरू किया था जब वे बृहस्पति के चंद्रमा आयोग का निरीक्षण में लगे थे।

रोमन ने यह देखा था कि आयोग के दिखाई देने के वक्त के अंतर तथा बृहस्पति और पृथ्वी के बीच दूरियों में आने वाले अंतर से प्रकाश की गति की गणना कर सकते हैं। रोमन ने गणना की और प्रकाश गति को 210000 किलोमीटर/सेकंड  पर पाया। चूंकि इसके बाद कई वैज्ञानिकों ने इस संबंध में कई आंकड़े तैयार किए। वर्तमान विज्ञान के अनुसार प्रकाश गति लगभग 300000 किलोमीटर/सेकंड होती है।

प्रकाश की चाल एक भौतिक नियतांक है। निर्वात में इसका सटीक मान 299,792,458 मीटर प्रति सेकंड है जिसे प्राय: 300000 किलोमीटर/सेकंड कह दिया जाता है। सभी विद्युत चुंबकीय तरंगे जैसे रेडियो तरंगे गामा किरणें प्रकाश आदि समेत गुरुत्वीय सूचना का बैग भी इतना ही होता है।

चाहे प्रेक्षक का फ्रेम ऑफ रिफरेंस कुछ भी हो या प्रकाश उत्सर्जक स्रोत किसी भी वेग से किधर भी गति कर रही हो परंतु हर प्रेक्षक को प्रकाश का यही वेग अकसर मिलता है। दीक् काल में कोई भी वस्तु प्रकाश के वेग से अधिक वेग पर गति नहीं कर सकती हैं।

प्रकाश के इस वेग का सटीक मान ज्ञात करना काफी महत्वपूर्ण कार्य होता है क्योंकि प्रकाश विद्युत चुंबकीय घटनाओं का एक अभिन्न अंग होता है। ऊर्जा संचार के  जितने भी तरह के कार्य होते हैं उनमें इसका उपयोग अति आवश्यक है।

प्रकाश का वेग समय यात्रा में सहायक होता हैं। आइंस्टीन के सापेक्षता के इस विशेष सिद्धांत के तहत यदि प्रकाश के गति की तुलनात्मक चाल पर गमन किया जाए तो समय किसी स्थिर प्रेक्षक की तुलना में भिन्न हो जाएगा।

प्रकाश के आविष्कार का इतिहास ?

प्रारंभिक काल में कई वैज्ञानिकों का मानना था कि प्रकाश की गति अनंत है। वह तत्क्षण किसी भी दूरी की यात्रा नहीं कर सकती हैं। 17 वी सदी में एक भौतिक वैज्ञानिक गैलीलियो गैलीली ने एक प्रयोग किया था और वे प्रकाश की गति को मापने की कोशिश करने वाले पहले व्यक्ति थे।

अपने प्रयोग में उन्होंने कुछ किलोमीटर की दूरी पर स्थित 2 टीलो पर दो व्यक्तियों को खड़ा कर दिया और उन दोनों व्यक्तियों को एक-एक लालटेन पकड़ा दिया और उसे कपड़े से ढक कर रखने के लिए कहा।

फिर उन्होने बारी-बारी से दोनों व्यक्तियों को अपने-अपने लालटेन से कपड़े हटाने को कहा ताकि जब एक व्यक्ति कपड़ा हटाए तो दूसरे व्यक्ति को लालटेन की रोशनी दिखाई दे और जब दूसरा व्यक्ति कपड़ा हटाए तो पहले व्यक्ति को लालटेन की रोशनी दिखाई दे।

Light ka avishkar kisne kiya।
Light ka avishkar kisne kiya

दरसल गैलेलियो लालटेन संकेतों के मध्य के वक्त को दर्ज करना चाहते थे लेकिन वे हमेंशा की तरह असफल साबित हुए चूंकि प्रकाश की जो गति थी। वह बहुत तेज थी और इसकी गति को ज्ञात करने के लिए ली गई दूरी बहुत छोटी थी। इसके अलावा इसकी गति की माप के अंतर में ग्रहीय निर्धारण की जरूरत होती है।

प्रकाश की गति का पहला सफल माप सन् 1676 में  हुआ था या यह कह सकते हैं कि ओल्स रोमर द्वारा प्रकाश की गति का निर्धारण किया गया था एवं वह पहले ऐसे व्यक्ति थे।

जिन्होंने यह प्रमाणित किया था कि प्रकाश एक सीमित गति से यात्रा करती हैं। उनका सिद्धांत बृहस्पति के चंद्रमा के ग्रहण के अवलोकन पर आधारित था। वह जब बृहस्पति के चन्द्रमा में से किसी एक का अध्ययन कर रहे थे तो उन्होंने देखा की उस चंद्रमा के ग्रहों के बीच का समय पूरे वर्ष में अलग-अलग होता है और यह पृथ्वी के बृहस्पति के नजदीक आने या उससे दूर जाने पर आधारित है।

उन्होंने यह अवलोकन किया कि जब पृथ्वी बृहस्पति से दूर चली जाती है तो दो ग्रहों के बीच का समय बढ़ जाता है और जब पृथ्वी बृहस्पति के नजदीक आती है तो 2 ग्रहों के बीच का समय घट जाता है। 6 महीने की अवधि में “लो” के कुल 102 ग्रहण हुए थे।

जिसमें अधिकतम समय अंतराल 16.5 मिनट था। रोमर ने उस समय इस अंतराल की व्याख्या बृहस्पति और पृथ्वी के बीच प्रकाश की यात्रा में लगने वाले समय के रूप में किया था। उन्होंने प्रकाश की गति 214000 किलोमीटर प्रति सेकंड निर्धारित किया था जबकि प्रकाश की वर्तमान गति 299792 किलोमीटर प्रति सेकंड है।
इसका कारण यह था कि रोमर को पृथ्वी की कक्षा के व्यास की सही जानकारी नहीं थी और इसके अलावा इस अंतराल की माप में भी कुछ त्रुटियाँ थी।

निष्कर्ष ( conclusion )

दोस्तों हम आशा करते हैं कि आपको हमारी यह लेख Light ka avishkar kisne kiya पसंद आई होगी क्योंकि यहां हमने प्रकाश के आविष्कार को लेकर सभी महत्वपूर्ण खोजों का वर्णन किया है।

प्रकाश से जुड़ी किसी भी प्रकार के प्रश्न होने पर या इससे जुड़ी जानकारियां प्राप्त करने के लिए हमें नीचे कमेंट बॉक्स में कमेंट करके जरूर बताएं।

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