दुनिया का सबसे बड़ा बम कौन सा है?

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दुनिया का सबसे बड़ा बम कौन सा है
दुनिया का सबसे बड़ा बम कौन सा है

दुनिया का सबसे बड़ा बम कौन सा है? : आज हम एक ऐसे देश और उसके आविष्कार के बारे में बताने वाले हैं, जिससे संबंधित खोज और रोचक तथ्य को जानकर आप आश्चर्यचकित हो जाएंगे। हम बात करने वाले हैं रूस देश के बारे में, जिसने दुनिया का सबसे बड़ा बम बना डाला। यह सुनने में जितना आश्चर्यचकित लग रहा है, उससे भी कहीं ज्यादा इसमें शक्ति और विशालता व्याप्त है।

हम सब यह तो जानते हैं कि अमेरिका द्वारा जापान पर हिरोशिमा और नागासाकी परमाणु बम गिराए गए थे लेकिन क्या आप यह जानते हैं कि रूस ने भी एक ऐसा परमाणु बम का आविष्कार कर लिया था, जिससे पूरे विश्व का खात्मा होने वाला था। रूस के द्वारा बनाया गया यह बम वाकई में बेहद खतरनाक और जानलेवा है। रूस के पास दुनिया का सबसे खतरनाक बम उपलब्ध है जिसका नाम है ‘जार’।

रूस द्वारा बनाया गया यह बम पृथ्वी पर गिरे तो पृथ्वी का तहस-नहस हो जाएगा। रूस द्वारा बनाया गया यह बम दुनिया का सबसे बड़ा बम है जिसे एक एटॉमिक बम भी कहा जा सकता है। यह बम कुछ ही सेकेंड में पूरी दुनिया को तबाह कर सकता है।

अमेरिका ने जिस प्रकार जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराए थे, उसी प्रकार लेबनान की राजधानी बेरुत पर भी धमाका देखने को मिला। रूस ने इस आविष्कार को पूरी दुनिया से 59 वर्षों तक रहस्यमई रखा और किसी को भनक तक नहीं लगने दी। 59 वर्षों के बाद यह बम परीक्षण का वीडियोवायरल हुआ। यह बम यदि अपनी पूरी क्षमता के साथ फटता तो पूरे विश्व का तहस-नहस तो होना ही था।

1961 मे रूस ने बनाया दुनिया का सबसे बड़ा बम

दुनिया का सबसे बड़ा बम कौन सा है
दुनिया का सबसे बड़ा बम कौन सा है

1961 में रूस ने दुनिया का सबसे खतरनाक और सबसे अधिक शक्तिशाली हाइड्रोजन का प्रयोग कर बम का परीक्षण किया। उस समय यह दुनिया के लिए सबसे महत्वपूर्ण रहस्यमय थी जिसके बारे में कोई नहीं जानता था और उसने यह बात किसी को पता लगने भी नहीं थी। 60 वर्ष के बाद रूस ने इस खतरनाक बम का परीक्षण दुनिया के सामने जारी किया। 1961 ईस्वी में रूस और सोवियत संघ ने मिलकर दुनिया के सबसे बड़े का full secret mission जारी किया।

इसके बाद दोनों देश मिलकर हाइड्रोजन के जरिए इस विस्फोटक बम के विस्फोट से संबंधित तैयारियों में जुट गए। परंतु देखा जाए तो यदि वास्तव में रूस द्वारा तैयार किए गए इस बम के मिशन में थोड़ी सी भी गलती अथवा चूक हो जाती तो पूरी दुनिया को तबाह होने से कोई नहीं रोक सकता था।

अमेरिका के ‘लिटिलबॉय’ से 3,333 गुना शक्तिशाली

रूस द्वारा बनाए गए इस बम का प्रभाव का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि जापान पर गिराए गए हिरोशिमा और नागासाकी बम से भी यह 3,333 गुना ज्यादा शक्तिशाली था। इसका मतलब इसके मजबूती से हम इस बात का अंदाजा लगा सकते हैं कि इससे होने वाला प्रभाव जापान से 3,333 गुना ज्यादा तबाही भरा होगा।

वहीं दूसरी ओर यदि दुनिया के सबसे शक्तिशाली बम की बात करें तो रूस ने ही इस बम का आविष्कार किया था। रूस का यही ‘वाइन’ विस्फोटक दुनिया का सबसे सर्वशक्तिशाली बम विस्फोटक माना जाता है। यह करीब 50 मेगाटन के बराबर था और 5 करोड़ टन परंपरागत सर्वशक्ति से फटा था।

संपूर्ण विश्व के नष्ट होने की संभावना

रूस ने जिस क्षेत्र में इस बम का प्रयोग किया था वह क्षेत्र  भौगोलिक दृष्टि से पूरी तरह बदल गया था। दुनिया ने परमाणु बम का असर तो देख ही लिया था पर रूस के इस बम से साबित हो गया था अगर कभी भी दोबारा परमाणु युद्ध छिड़ा तो मानवता का खात्मा हो जाएगा।

अमेरिका से आगे निकलने की होड़ में रूस द्वारा बम का निर्माण

हम सभी जानते हैं कि अमेरिका एक शक्तिशाली और संपन्न देश है। अमेरिका बम बनाने के मामले में सोवियत संघ से बहुत ही आगे था, जिससे बौखला कर रूस ने यह प्रतिज्ञा ले ली कि वह एक ऐसा बम का परीक्षण करेगा जो दुनिया का सबसे बड़ा बम होगा।

इसी बीच अमेरिका ने 1954 में सबसे बड़े थर्मोन्यूक्लियरडिवाइस का मार्शलआईलैंड पर परीक्षण किया। यह डिवाइस 15 मेगा टन का था, जिसका नाम कास्टलब्रावो (Castle Bravo) था। यह उस समय का सर्वशक्तिमान परमाणु बमों में से एक था। जब इसकी सूचना सोवियत संघ को मिली उसने अमेरिका को टक्कर देने के लिए ‘ जार ‘ बम बनाया, जो दुनिया का सबसे बड़ा बम है।

शीत युद्ध में अमेरिका से बेहतर प्रदर्शन की लालसा

अमेरिका के साथ चल रहे शीत युद्ध अर्थात cold war में अपनी शक्ति दिखाने के लिए रूस देश में अपने इस सबसे बड़े बम का परीक्षण 30 अक्टूबर 1961 में बैरंट सागर में किया। इस बम के विनाशक क्षमता को देखते हुए इसे धरती का खात्मे का हथियार कहा जाने लगा।

रूस द्वारा बनाया गया यह बम दुनिया का सबसे बड़ा बम है जिसका युद्ध में इस्तेमाल करना मुश्किल है क्योंकि इससे विशाल मात्रा में धन जन की क्षति हो सकती है। इतना ही नहीं इसके अलावा संपूर्ण भू-भाग और भौगोलिक स्थिति का नक्शा पूरी तरह से बदल सकता है। मानव निर्मित वस्तुओं के मामले में कई बार ऐसा होता है कि बहुत बड़ा करने के चक्कर में हम कई बार इतना बड़ा वस्तु तैयार कर लेते हैं, जिसे इस्तेमाल करना मुश्किल हो जाता है और यह एक घातक परिणाम दे सकता है।

यदि इंसानियत के नाते देखा जाए तो यह भी ठीक ही हुआ नहीं तो धरती पर भयंकर तबाही मच जाती । बात बीसवीं सदी के साथ के दशक की है, दूसरा विश्व युद्ध खत्म हो चुका था। अमेरिका ने तो अपनी ताकत हिरोशिमा और नागासाकी बम जापान पर गिरा कर दिखा दी थी।

अमेरिका और सोवियत संघ के बीच मनमुटाव

दूसरे विश्व युद्ध खत्म होते ही अमेरिका और रूस में विभिन्न प्रकार के मनमुटाव हो गए थे। दोनों देश एक दूसरे से ऊपर उठने के लिए एक से एक हथियार और बम का परीक्षण कर रहे थे।

आखिर कार सोवियत संघ ने एतनी वैज्ञानिक आंद्रेई सखा राओ ने साठ का दशक आते-आते ऐसा बम तैयार कर लिया, जिसका नाम ‘जार बम’ दिया गया। दरअसल जार रूस के राजाओं की उपाधि थी, उन्हीं के नाम पर कम्युनिस्ट सरकार ने दुनिया के सबसे बड़े बम का नाम जार रखा। इस बम के लिए लड़ाकू जहाज भी बनाए गए।

निष्कर्ष

दोस्तो इस पोस्ट के माध्यम से आपने सीखा की दुनिया का सबसे बड़ा बम कौन सा है? आशा करता हु दोस्तो आपको यह पोस्ट पसंद आये होगी।और समझमे आएगाहोगा कि दुनिया का सबसे बड़ा बम कौन सा है ।दोस्तो यदि आपको यह जानकारी अच्छी लगी तो इसे शोसलमीडिया पर शेयर जरूर करे। जिससे अन्य लोगो को भीइसके बारेमें पताचलसके।धन्यवाद….

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